Tuesday, May 1, 2012

एक नया अनुभव




एक नया अनुभववव








(हरिवंश राय बच्चन)

 प्रस्तुतकर्ता: प्रेम सागर सिंह

मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक
कविता लिखना चाहता हूँ।
चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों में
मेरे परों की रंगीनी है?'
मैंने कहा, 'नहीं'
'
तुम्हारे शब्दों में मेरे कंठ का संगीत है?'
'
नहीं।'
'
तुम्हारे शब्दों में मेरे डैने की उड़ान है?'
'
नहीं।'
'
जान है?'
'
नहीं।'
'
तब तुम मुझ पर कविता क्या लिखोगे?'
मैनें कहा, 'पर तुमसे मुझे प्यार है'
चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
एक अनुभव हुआ नया।
मैं मौन हो गया!

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34 comments:

  1. bahut sundar bimb ke sath sundar kavita..

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  2. प्यार की एक नयी परिभाषा.
    शनै शनै बच्चन जी की सभी कविताओं से आप परिचय करा रहे हैं, आभार !

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    1. मेरे पिछले पोस्ट को भी देंखे । धन्यवाद ।

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  3. 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
    एक अनुभव हुआ नया।
    मैं मौन हो गया!

    बच्चन जी की रचनाओं से परिचय कराने के लिए आभार,....

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  4. प्रेम को एक नयी परिभाषा दे गया चिड़िया और कवि का संवाद ..!

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  5. साहित्य सागर से अनमोल मोती चुनकर हम तक पहुचाने के लिए आपका आभार....

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  6. चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'

    मतलब प्यार

    प्यार है ।

    आभार ।।

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  7. शब्द-शब्द में सुंदर भाव...

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  8. बिलकुल सही..
    हम गुलाब की सुंदरता पर मुग्ध होते हैं और उस सुंदरता का वर्णन पंखुड़ियों में, रंगों में, खुशबू में करने लगते हैं.. किसी ने अगर सचमुच गुलाब की सुंदरता देखी होती तो बयान ही नहीं कर पाता.. बच्चन जी की यह रचना ईमानदारी से भरी और भावनाओं से सजी है!!

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    1. आपने अपनी टिप्पणी देकर इस कविता की सुंदरता में चार चाँद लगा दिया है । धन्यवाद ।

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  9. बच्चन जी की रचनाओं से परिचय कराने के लिए आभार,...

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,मन को प्रभावित करती सुंदर रचना,.....

    MY RECENT POST.....काव्यान्जलि.....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  10. Replies
    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  11. शब्दों के लिये इतना श्रंगार ढोना सच में कठिन हो जाता है।

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  12. बहुत सुंदर कविता..सुबह की धूप जैसी !

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  13. शब्द-शब्द में सुंदर भाव...प्रभावित करती सुंदर रचना,.....

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  14. चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
    एक अनुभव हुआ नया।
    मैं मौन हो गया!

    ....बिलकुल सच...एक सुन्दर रचना पढवाने के लिये आभार....

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  15. बहुत ही विचारोत्तेजक कविता है यह।

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  16. सूचनार्थ: ब्लॉग4वार्ता के पाठकों के लिए खुशखबरी है कि वार्ता का प्रकाशन नित्य प्रिंट मीडिया में भी किया जा रहा है, जिससे चिट्ठाकारों को अधिक पाठक उपलब्ध हो सकें। 

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  17. 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
    एक अनुभव हुआ नया।
    मैं मौन हो गया!
    मन को छूते हुए भाव कविता के ...आपका इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिए आभार ।

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  18. बेहतरीन..
    मैनें कहा, 'पर तुमसे मुझे प्यार है'
    चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
    एक अनुभव हुआ नया।
    मैं मौन हो गया!
    बहुत खूब....

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    1. आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  19. अंतिम पंक्तियों ने दिल छु लिया....

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  20. 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'……मौन मे ही तो प्रेम भासता है

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    1. वंदना जी सच ही कहा है आपने कि मौन में ही प्रेम का वास्तविक स्वरूप और रंग खिलते रहता हऐ। । आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  21. अद्भुत रचना प्रस्तुत की है आपने प्रेम जी...वाह...

    नीरज

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  22. चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
    एक अनुभव हुआ नया।
    मैं मौन हो गया!....bachchan ji ki umda rachna padhwane ke liye punh aabhar...

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