Sunday, September 2, 2012

किसी देश की युवा पीढ़ी उस देश की रीढ़ होती है


    
   किसी देश की युवा पीढ़ी उस देश की रीढ़ होती है


  
               
            प्रस्तुतकर्ता : प्रेम सागर सिंह


समय अनमोल है इसका मूल्य निर्धारण नही किया जा सकता। समय जो बीत गया सो बीत गया। लाखो करोड़ो रूपये खर्च करने पर भी बीता हुआ समय वापस नही आता। आज का समय तमाम बीती हुई सदियों के कठिन समय में से है जहां मनुष्य की परंपराएं, उसके मूल्य उसके आचरण और उसका अपना जीवन शैली ऐसे संघर्षों के बीच घिरा है, जहां से निकल पाने की कोई राह आसान दिखाई नही पड़ती। भारत जैसे बेहद परंपरावादी, सांस्कृतिक वैभव से भरे-पूरे और साधु-संतों, सनातन धर्म का विपुल भंडार इस समाज के सामने भी आज का समय बहुत चुनौतियों के साथ खड़ा है। आज के समय मे शत्रु और मित्र पकड़ में नही आते। हर चमकती हुई चीज स्वर्ण नही होती है यानि किसी पर विश्वास करना उतना आसान नही है। जीवन कभी जो बहुत सहज हुआ करता था, आज के समय में बहुत जटिल नजर आ रहा है, तो इसके पीछे आज के युग का बदला हुआ दर्शन है, बदला हुआ नजरिया है।

भारत बहुरंगी संस्कृतियों के इंद्रधनुषी सौदर्य से संपूर्ण विविधता में एकता को प्रतिष्ठित करने वाला देश है। इस धरती में वह एक समय था जहां त्याग और बलिदान के एक नही अनेक दृष्टांत मौजूद हैं। त्याग का नितांत उदाहरण मर्यादा पुरूषोत्तम राम, त्याग और अहिंसा का संदेश देने वाले महावीर स्वामी, महात्मा बुद्ध की अमर वाणी, श्री कृष्ण का कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदचनम का संदेश कभी भुलाया नही जा सकता। परंतु भारतीय परंपरा आज के समय में बहुत संकुचित दिखाई दे रही है। हमारी उज्जवल परंपरा, जीवन मूल्य, विविध विषयों पर लिखा गया श्रेष्ठ साहित्य, आदर्श, सब कुछ होने के वावजूद हम अपने आप को कहीं न कहीं कमजोर पाते हैं। यह समय हमारी आत्मविश्वसनीयता का ही समय है। इस समय ने हमें प्रगति के अनेक अवसर दिए हैं। एक जमाना था कि भारत में सूई तक नही बनती थी किंतु आज उपग्रह का भी सफल निर्माण हो रहा है। अनेक ग्रहों को नापती मनुष्य की आकांक्षाएं, चांद पर घर बनाने की लालसाएं, बड़े-बड़े मेगामाल्स, सैकड़ों चैनलों वाला टी.वी. विशाल होते भवन, कारों के नए मॉडल, ये सारी चीजें भी हमें कोई ताकत नही दे पाती। विकास के पथ पर दौड़ती नई पीढ़ी ताकत से अधिक पाने की लालच में जिंदगी की खुशी नही समेट पा रही है। सब कुछ रहते हुए भी वे दुखी रहते हैं, कृत्रिम हसी हसते हैं एवं उधार की जिंदगी जीते हैं।

इक्कीसवीं सदी में प्रवेश करने वाली नई जमाने की पीढ़ी बहुत कम समय में अधिक पाना चाहती है और इसके लिए उसे किसी भी मूल्य को आत्मसमर्पित करना पड़े, तो कोई हिचक नही है। इस बदलते जमाने ने हमें ऐसे युवा पीढ़ी के दर्शन कराएं हैं जो बदहवस है। उनके प्रेरणा और आदर्श बदल गए हैं। आज की युवा पीढ़ी में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही नशाखोरी सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। युवाओं में आवेग अधिक होता जा रहा है। उन्हे सपने देखने की आदत होती है। जब वो सपना पूरा नही होता है तो वे टूट जाते हैं नशे के गुलाम बन जाते हैं। सपनों के टूटने और बिखरने के सिलसिले में लोग गलत रास्ते पर चल रहे हैं। यह समय उन सपनों के गढ़ने का है,जो सपने पूरे तो होते हैं लेकिन उसके पीछे तमाम लोगों के सपने दफन हो जाते हैं। ये समय सेज का समय है, निवेश का समय है। किसी देश की युवा पीढ़ी उस देश की रीढ़ होती है और रीढ़ ही मजबूत न होगी तो देश, समाज, मानवता के स्थायित्व की संभावना केवल कल्पना बन कर रह जाएगी एवं आदर्श इसका मजाक उड़ाएगा।

आज की शिक्षा ने नई पीढ़ी को संस्कार और समय किसी की समझ नही दी है। यह शिक्षा मूल्यहीनता को बढाने वाली साबित हुई है। अपनी चीजों को कमतर करके देखना और बाहरी सुखों की तलाश करना इस जमाने को और विकृत कर रहा है। परिवार और उसके दायित्व से टूटता सरोकार भी आज जमाने के ही मूल्य है। अविभक्त परिवारों की ध्वस्त होती अवधारणा, अनाथ माता-पिता, फ्लैट्स में सिकुड़ते परिवार, प्यार को तरसते बच्चे, नौकरों, दाईयों एवं ड्राईवरों के सहारे जवान होती नई पीढ़ी हमें क्या संदेश दे रही है! यह बिखरते परिवारों का भी जमाना है। इस जमाने ने अपनी नई पीढ़ी को अकेला होते और बुजुर्गों को अकेला करते भी देखा है। बदलते समय ने लोगों को ऐसे खोखले प्रतिष्ठा में डूबो दिया है जहां अपनी मातृभाषा में बोलने पर कम प्रतिष्ठावान और अंग्रेजी में बोलने पर प्रतिष्ठा बढ़ने का एहसास दिलाता है। माता-पिता के इच्छा के विरूद्ध अपनी बिरादरी को छोड़कर अन्य विरादरी में मनपसंद लोगों को चुनते हैं एवं शान से कहते हैं कि MERA LOVE MARRIAGE है। हो सकता है मेरा यह कथन किसी को अच्छा न लगे लेकिन इस सत्य से हम विमुख तो नही हो सकते कि आज भी कुछ सामाजिक वर्जनाएं हमारे समक्ष प्राचीर बनकर खड़ी हैं।

बदलते काल चक्र ने हमारे साहित्य को, धार्मिक ग्रंथों को, हमारी कविताओं को पुस्तकालयों में बंद कर दिया है, जहां ये किताबें अपने पाठकों के इंतजार में समय को कोस रही हैं। हम इस बदलती सदी के कठिन समय की हर पीड़ा का समाधान पा सकते हैं, बशर्ते आत्मविश्वास के साथ हमें उन बीते हुए समयों की ओर देखना होगा जब भारतीयता ने पूरे विश्व को अपने दर्शन से एक नई चेतना दी थी। यह चेतना भारतीय जीवन मूल्यों के आधार पर एक नया समाज गढ़ने की चेतना है। यह चेतना हर समय में मनुष्य को जीवंत रखने, हौसला न हारने, नए-नए अवसरों को प्राप्त करने, आधुनिकता के साथ परंपरा के तालमेल की ऐसी विधा है जिसके आधार पर हम अपने देश का भविष्य गढ़ सकते हैं। भारतीय चेतन में मनुष्य अपने समय से संवाद करता हुआ आने वाले समय को बेहतर बनाने की चेष्टा करता है। वह पीढ़ियों का चिंतन करता है। आने वाले समय को बेहतर बनाने के लिए सचेतन प्रयास करता है। हमें नई पीढ़ी को एक नई दिशा और दशा देनी होगी।

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11 comments:

  1. सच कहा आपने, उदाहरण और कार्य सामने उपस्थित है।

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  2. नए पीढ़ी के युवाओं,करना तुम्हे प्रयास
    देश को नई दिशा दो,तुम पर है विश्वास,,,,

    RECENT POST-परिकल्पना सम्मान समारोह की झलकियाँ,

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    1. धीरेद्र जी, धन्यवाद।

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  3. बदलते समय ने लोगों को ऐसे खोखले प्रतिष्ठा में डूबो दिया है जहां अपनी मातृभाषा में बोलने पर कम प्रतिष्ठावान और अंग्रेजी में बोलने पर प्रतिष्ठा बढ़ने का एहसास दिलाता है।

    sahmat

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  4. सुन्दर आलेख. सादर.

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  5. सुन्दर चेतना को जागृत कराती पोस्ट .

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  6. बहुत बढ़िया चिंतन-मनन से भरपूर प्रस्तुति ..आभार

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  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 4/9/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच http://charchamanch.blogspot.inपर की जायेगी|

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    1. धन्यवाद, राजेश कुमारी जी ।

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  8. अंदर तक झंझोर गई ये पोस्ट ...
    सच लिखा है ...

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