Saturday, January 21, 2012

डॉ. धर्मवीर भारती




सृजन-धर्मिता से साहित्य का आसमान नापने वाले लेखक :डॉ.धर्मवीर भारती

(जन्म:25-12-1926 निधन: 04-09-1997)

"पर कोई न कोई चीज ऐसी है जिसने हमेशा अँधेरे को चीर कर आगे बढ़ने, समाज-व्यवस्था को बदलने और मानवता के सहज मूल्यों को पुनः स्थापित करने की ताकत और प्रेरणा दी है । चाहे उसे आत्मा कह लो, चाहे कुछ और जो विश्वास, साहस, सत्य के प्रति निष्ठा, उस प्रकाशवादी आत्मा को उसी तरह आगे ले चलते हैं जैसे सात  घोड़े सूर्य को आगे बढ़ा ले चलते हैं।“………….. डॉ. धर्मवीर भारती  (सूरज का सातवां घोड़ा से अवतरित)


                        
                    प्रस्तुतकर्ता:प्रेम सागर सिंह

आज मैं एक ऐसे लेखक के बारे में कुछ लिख रहा हूं जिन्होंने लेखन की दुनिया में ही नही वरन पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी कीर्ति का परचम फहराया। उन दिनों साहित्य के प्रति अनुराग रखने वाले लोगों के हाथों में धर्मयुग पत्रिका हुआ करती थी। इस तरह की प्रविष्टियों को ब्लॉग पर प्रस्तुत करने की पष्ठभूनि में मेरा यह प्रयास रहता है कि हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान प्रकाशस्तंभों का सामीप्य-बोध हम सबको अहर्निश मिलता रहे एवं हम सब इन साहित्यकारों की अनमोल कृतियों एवं उनके जीवन दर्शन की घनी छांव में अपनी साहित्यिक ज्ञान-पिपासा में अभिवृद्ध करते रहें। आईए,एक नजर डालते हैं, डॉ. धर्मवीर भारती जी पर, उनके जीवन एवं कृतियों पर जो हमें कभी बिखरने नही देती हैं । - प्रेम सागर सिंह

हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध हस्ताक्षर धर्मवीर भारती आधुनिक  हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वे एक समय की प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे। डॉ धर्मवीर भारती को 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.उनका उपन्यास गुनाहों का देवता सदाबहार रचना मानी जाती है। सूरज का सातवां घोड़ा को कहानी कहने का अनुपम प्रयोग माना जाता है, जिसे श्याम बेनेगल ने इसी नाम की फिल्म बनायी अंधा युग उनका प्रसिद्ध नाटक है।इब्राहिम अलकाजी, राम गोपाल बजाज, अरविंद गौड़, रतन थियम, एस.के.रैना, एवं मोहन महर्षि, और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशको ने इसका मंचन किया है । भारती का जन्म प्रयाग में हुआ और शिक्षा  प्रयाग विश्वविद्यालय से प्राप्त की।  प्रथम श्रेणी में एम.ए की परीक्षा  उतीर्ण करने के बाद डॉ धीरेन्द्र वर्माके निर्देशन में सिद्ध साहित्य पर शोध-प्रबंध लिखकर उन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इनका कार्यक्षेत्र  अध्यापन रहा एवं उस दौरान भी वे समर्पित भाव से अपनी सेवाएं प्रदान करते रहे। 1948 में 'संगम' सम्पादक श्री इलाचंद्र जोशी में सहकारी संपादक नियुक्त हुए। दो वर्ष वहाँ काम करने के बाद हिंदुस्तानी अकादमी में अध्यापक नियुक्त हुए एवं सन् 1960 तक वहां कार्य किया। प्रयाग विश्वविद्यालय में अध्यापन के दौरान 'हिंदी साहित्य कोश' के सम्पादन में सहयोग दिया। निकष’' पत्रिका निकाली तथा 'आलोचना' का सम्पादन भी किया। उसके बाद ' धर्मयुग ' में प्रधान सम्पादक पद पर बम्बई आ गये। 1987 में डॉ भारती ने अवकाश ग्रहण किया। 1999 में युवा कहानीकार उदय प्रकाशके निर्देशन में साहित्य अकादमी, दिल्ली के लिए डॉ० भारती पर एक वृत्त चित्र का निर्माण भी किया गया । सृजन-धर्मिता से साहित्य का आसमान नाप लेने की तड़प रखने वाले इस महान साहित्यकार ने 4 सितम्बर 1997 को मुम्बई में आखिरी साँस ली परन्तु सृजन-शीलता की जिस पाठशाला को उन्होंने आरंभ किया था वह भौतिक संसार में उनकी अनुपस्थिति के बाद भी गतिमान है।उन्होंने हिंदी साहित्य की सेवा बड़े ही लगन के साथ किया। उनकी कृतियां आज हस सबके लिए अनमोल धरोहर बन गयी हैं।  साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने वाले भारती जी को उनकी अमूल्य सेवाओं के लिए उन्हे निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

1. हल्दी घाटी श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार (1984)
2. महाराणा मेवाड़  फाउंडेशन   (1988)
3. सर्वश्रेष्ठ नाटककार पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी  दिल्ली  (1989)
4. भारत भारती पुरस्कार उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान (1990)
5. महाराष्ट्र गौरव, महाराष्ट्र सरकार (1994)
  6. व्यास सम्मान ( के. के. बिड़ला फाउंडेशन )

कहानी संग्रह :- मुर्दों का गाव, स्वर्ग और पृथ्वी, चाद और टूटे हुए लोग, बंद गली का आखिरी मकान, सास की कलम से, समस्त कहानियाँ एक साथ
काव्य रचनाएं -: ठंडा लोहा, सात गीत, वर्ष कनुप्रिया, सपना अभी भी, आद्यन्त
उपन्यास:- गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश, प्रारंभ व समापन
निबंध :- ठेले पर हिमालय, पश्यंती
कहानियाँ : -अनकही, नदी प्यासी थी, नील झील, मानव मूल्य और साहित्य, ठण्डा लोहा,
पद्य नाटक : अंधा युग
आलोचना  : प्रगतिवाद : एक समीक्षा, मानव मूल्य और साहित्य
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