Tuesday, October 25, 2011

भोजपुरी दुनिया का संस्कारी पुरूष: :मिथिलेश्वर

भोजपुरी दुनिया का संस्कारी पुरूष : मिथिलेश्वर

प्रेम सागर सिंह

भोजपुरी साहित्य एवं समाज की बात करते समय कभी शिवपूजन सहाय की रचना देहाती दुनिया का स्मरण आने लगता है एवं उनके बीच जो नाम मन पर असर कर जाता है, वह नाम है मिथिलेश्वर । ये समय और समाज के आंतरिक संबंधों के जटिल रूपाकार को खंगालने एवं जनवादी सरोकारों से संपृक्ति रखने वाले महत्वपूर्ण रचनाकार हैं । अपने वृहत उपन्यासों में कथा-विन्यास की अदभुत बुनावट एवं वैचारिक प्रखरता के तालमेल के कारण उनकी कृतियाँ पठनीय होने के साथ-साथ जनचेतना का भी प्रतिधिनित्व करती हैं । यही कारण है कि अपनी नवीनतम पुस्तक भोजपुरी लोककथा एवं जमुनी के सृजन कार्य से भाषा और प्रस्तुति के स्तर पर भोजपुरी लोककथाओं को अपनी सहज-सरल, संवेदना से न केवल परिपुष्ट करते हैं, बल्कि लोकभाषा की प्रकृति व संस्कृति को साबित भी करते हैं । ग्राम्य जीवन और जनसमाज की विकट समस्याओं व जमीनी सच्चाईयों को आधार बना कर लिखी गयी इस संग्रह की लोककथाएं कोरी उपदेशपरकता के बजाए अपनी विलक्षण किस्सागोई से अपना विश्वसनीय रूपाकार ग्रहण करती हैं। भोजपुरी लोककथाओं से अपना जमीनी जुड़ाव रखने वाले मिथिलेश्वर प्रचलित लोककथाओं के मूल कथ्य को सुरक्षित रखते हुए उनकी रचना में ऐसी चमक पैदा करते हैं कि वे प्रदेश विशेष तक सीमित न रहते हुए सर्वग्राही बन जाती हैं । संग्रह में शामिल बुद्धि की कमाई चिट्ठी बँटवारा अंधेरपुर नगरी बटेर और कौआ राजा और घूसखोर चार चोर लकड़हारा और साँपचापलूस दरबारी आदि लोककथाओं में भोजपुरी की लोक संस्कृति की वास्तविक पहचान व जीवन-जगत की सार्थक व्याख्या तथा जमीनी सच्चाईयों को करीब से महसूस किया जा सकता है । वे अपने जमीनी जुड़ाव के चलते भोजपुरी की इन लोककथाओं की सृजनशीलता में बोली की मिठास और भावाभिव्यक्ति में विचित्र रसात्मकता का मिश्रण करते हैं । भोजपुरी लोककथाओं की विश्वसनीयता तथा सर्वग्राही शक्ति को प्रमाणित करते हुए लेखक की मान्यता है कि इस अनुभव ने मुझे सुखद रूप में में चमत्कृत कर दिया कि वगैर लिखित हुए सिर्फ वाचिक परंपरा में ही हमारी लोककथाएं सदियों से ही जीवित बनी हुई हैं । सचमुच यह बहुत बड़ी बात है । लोककथाओं की कालजयिता की पहचान भी । निस्संदेह इस तथ्य को अनदेखा नही किया जा सकता कि लोककथाएं महज मनोरंजन नही करती, बल्कि मानवतावादी मूल्यों की पक्षधरता को बुनियादी सरोकारों से सींचते हुए ठोस व्यावहारिक पहलुओं को व्याख्यायित करती है। मिट्टी की सोंधी सुगंध से संपृक्ति रखते हुए मिथिलेश्वर न केवल पुस्तक की भूमिका के माध्यम से, बल्कि इस संग्रह की लगभग सभी कथाओं की जीवनी शक्ति व लोक रस के महत्व को रेखांकित करते हैं। भोजपुरी साहित्य एवं हिंदी के प्रतिष्ठित कलाकार मिथिलेश्वर की हर रचना भोजपुरी लोकजीवन के विविध रंगों को रूपायित करने के साथ-साथ भोजपुरी समाज के रीति-रिवाज, आचार-व्यवहार तथा संस्कृतिक चेतना को रोचक किस्सागोई से सजाकर हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है । वे अपनी प्राय: सभी कृतियों में भारत की सबसे बड़ी लोकभाषा भोजपुरी की लोककथाओं के माध्यम से भोजपुरी संस्कृति की वास्तविक पहचान करवाते हैं । इसके साथ-साथ इनकी हर कृति भोजपुरी समाज के गतिशील-जीवंत जीवन मूल्यों को जमीनी संस्कृति से जोड़कर देखने की पहल भी करता है । बिहार राज्य के आरा जिले के अंतर्गत बैसाडीह गांव में जन्मे मिथिलेश्वर भोजपुरी साहित्य को जिस मुकाम पर लाकर खड़ा किए हैं, उसके लिए मेरी और से उन्हे बहुत-बहुत धन्यबाद । भोजपुरी जनजीवन की लोक परंपराओं एवं बहुआयामी ज्ञान की पिपासा को बढ़ाने के लिए उनकी हाल ही में प्रकाशित कृति जमुनी अवश्य पढें । आज के साहित्यकार जिस रूप से साहित्य-सृजन की बुनियाद को नित नए आयाम दे रहे हैं, उसे देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि कालांतर में इन चेहरों के घने जंगल में क्या मिथिलेश्वर को ढूढ़ पाना संभव हो पाएगा !

51 comments:

  1. मिथिलेश्वर के बारे में जानकारी देने के लिए आभार !
    दीपावली पर आपको और परिवार को हार्दिक मंगल कामनाएं !
    सादर !

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  2. मिथिलेश्वर जी के बारे में आपके इस आलेख ने उनके सारे रचना संसार का सैर करने का भाव जगा दिया है।
    दीपावली की शुभकामनाएं।

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  3. सुंदर कविता, सुंदर भाव।
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  4. अच्‍छी पोस्‍ट ..
    .. आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!

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  5. रोचकता से दिये परिचय का आभार।

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  6. सुन्दर प्रस्तुति...दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  7. भोजपुरी भाषा कि वर्तमान स्थिति और श्रीमान मिथिलेश्वर के योगदान से सबंधित बड़ी अच्छी जानकारी उपलब्ध कराई आपने. धन्यवाद. दीवाली की शुभकामनाये.

    मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है :
    www.belovedlife-santosh.blogspot.com (हिंदी कवितायेँ)

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  8. सुंदर प्रस्तुति|
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  9. सुंदर प्रस्तुति...आपको दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं

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  10. बहुत अच्छी जानकारी.. कोशिश करूँगा की जमुनी पढने का मौक़ा मिले.. दीवाली की शुभकामना!!

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  11. मिथिलेश्वर जी के विषय में जानना सुखद लगा .उनकी कृति अवश्य कालजयी होंगी. सुन्दर आलेख के लिए आभार..***शुभ दीपावली ***

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  12. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुती! शानदार आलेख!
    आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  13. बबली जी , आपका आभार एवं .दीपावली की शुभकामनाएं ।

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  14. सुन्दर प्रस्तुति |

    दिवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  15. कुंवर कुसुमेश जी आपका आभार एवं .दीपावली की शुभकामनाएं ।

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  16. मेरे ब्लाग पर आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद।
    काफी जांकारियों को समेटे यह आलेख अच्छा है।
    आप को सपरिवार दीपावली की मंगलकामनाएं।

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  17. प्यार हर दिल में पला करता है,
    स्नेह गीतों में ढ़ला करता है,
    रोशनी दुनिया को देने के लिए,
    दीप हर रंग में जला करता है।
    प्रकाशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!!

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  18. अच्छी जानकारी मिली ..प्रयास रहेगा जामुनी पढ़ने का ...

    दीपावली की शुभकामनायें

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  19. जनजीवन की लोक परंपराओं एवं बहुआयामी ज्ञान की पिपासा को बढ़ाने के लिए मिथिलेश जी की कृति “जमुनी” पढ़ने की जिज्ञासा हो रही है. एक सुंदर परिचयात्मक आलेख.

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  20. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

    यह दीपावली आपके घर-परिवार में लाए खुशियां अपार, बढ़े सुख समृद्धि...हमारी मंगल कामनाएं...

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  21. श्री विजय माथुर, श्री मनोज कुमार जी, संगीता पुरी जी, मनोज भारती जी आपका आभार । दीपावली की शुभकामनाएं ।

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  22. दीपावली के पावन पर्व पर आपको मित्रों, परिजनों सहित हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ!

    way4host
    RajputsParinay

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  23. मिथिलेश्वर जी के साहित्य से परिचय कराने के लिए आभार। दीपावली की शुभकामनाएं।

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  24. आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

    सादर

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  25. मिथिलेश्वर जी के योगदान से अवगत करवाने का आभार.

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  26. सुन्दर प्रस्तुति...दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  27. जमुनी के प्रकाशक की जानकारी होती तो तलाशना आसान हो जाता.

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  28. राहुल जी आपका आभार । दीपावली की शुभकामनाएं । ' जमुनी ' की जानकारी नीचे प्रस्तुत कर रहा हूँ । आप इसे पढ़ने की कोशिश करें एवं उसके बाद मुझे इस पुस्तक के संबंध में अपने विचारों से मुझे अवगत कराएं ।

    लेखक- मिथिलेश्वर
    प्रकाशक-राजकमल प्रकाशन,प्रा.लि.
    1B,नेताजी सुभाष मार्ग,
    नई दिल्ली-110002
    मूल्य- रू.175/ (Without Discount)

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  29. ऋता शेखर 'मधु' जी, आपको भी मेरी ओर से दीपावली की शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  30. सुन्दर जानकारीपूर्ण पोस्ट के लिए आभार.
    मिथिलेश्वर जी के बारे में पहली दफा जाना.

    दीपावली व गोवर्धन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    मेरे ब्लॉग पर आप आये,इसके लिए भी आभार.

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  31. @आज के साहित्यकार जिस रूप से साहित्य-सृजन की बुनियाद को नित नए आयाम दे रहे हैं, उसे देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि कालांतर में इन चेहरों के घने जंगल में क्या मिथिलेश्वर को ढूढ़ पाना संभव हो पाएगा !- वाकई ,बहुत सही कहा है आपने.
    मेरे विचार से आज हमारे भारतीय समाज को मिथिलेश्वर जैसे ज़मीन से जुड़े रचनाकारों की ज़रूरत है. ज्ञानवर्धक आलेख के लिए आभार. दीपावली ,गोवेर्धन पूजा और भाई दूज की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं .

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  32. पढ़ने का प्रयास करूंगा। ...सुझाव के लिए आभार।

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  33. मिथिलेश्वर जी के बारे में आपके इस आलेख ने उनके बारे में बहुमूल्य जानकारी दी .....

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  34. मिथिलेश्वर जी के बारे में जानना अच्छा लगा ... उनका अतुलनीय योगदान के बारे में पढ़ना सुखद लगा ...
    आपको और परिवार में सभी को दीपावली की मंगल कामनाएं ...

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  35. Mithileshwar ji ke baare mein vistrit jaankaari praapt hui, aabhar.

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  36. डॉक्टर जेन्नी शबनम जी आपका आभार । आशा ही नही अपितु मेरा पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी आप मेरा मनोबल बढाने के लिए समर्पित वरहेंगी । धन्यवाद ।

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  37. भोजपुरी दुनिया का संस्कारी पुरूष : मिथिलेश्वर आपका यह आलेख बहुत महत्त्वपूर्ण है भाई प्रेम सागर सिंह जी । इस तरह की जानकारी ही ब्लाग को महत्त्वपूर्ण बनाती है । बहुत आभार !

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  38. आज आपका परिचय चर्चा मंच पर प्रस्तुत किया गया है |
    एक साल की बिटिया रानी : चर्चा मंच 681
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  39. सहज साहित्य, रविकर जी एवं डॉ.आर,रामकुमार जी आप सबका आभार ।

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  40. मिथिलेश्वर जी के विषय में जानना सुखद लगा .उनकी कृति पढ़ने का प्रयास रहेगा.

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  41. सिखा वार्ष्णेय जी आपका आभार ।

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  42. मिथलेश्वर जी की कहानिया पढ़ी हैं.. हिनुद्स्तान पटना, प्रभात खबर आदि के पन्नो पर उनकी कहानिया अक्सर आती थी.... आपका आलेख बढ़िया है... दीपावली की हार्दिक शुभकामना....

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  43. आपने कहानी पढने के साथ इस ब्लाग से परिचित कराया इसके लिये धन्यवाद । मुझे बहुत पहले ही देखना था । खैर ..। मिथिलेश्वर जी का नाम अब तक सिर्फ इसलिये याद था कि नौ वें आर्य सम्मान ( किताबघर दिल्ली)में रचनाओं के चयन में कमलेश्वर जी के साथ आप भी थे और उन में मेरी भी एक कहानी थी । आज आपका आलेख पढ कर उनकी रचनाएं पढने व और भी कुछ जानने की इच्छा हुई है । इससे पहले के आलेख गाँव ...ने भी प्रभावित किया है । दीपावली की मंगल-कामनाएं

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  44. श्री अरूण चंद्र रॉय जी एवं श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी, आशा करता हूं कि भविष्य में भी आप लोग मेरा मनोबल बढ़ात् रहेंगे। धन्यवाद ।

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  45. sunder prastuti . padh kar aur padhne ki tammana dil me hui ...... abhar .

    http/sapne-shashi.blogspot.com

    meri nayi post par aapki samikhsa ka intjar hai

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  46. मिथिलेश्वर जी के बारे में जानना अच्छा लगा।

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  47. Mithileshwar ji ke baare mei jaankar bahut acchha laga...
    fir se kuch seekha, jana...
    Thank you so much is post ke liye bhi...

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  48. Thank you, Puja. Wish to see you on my next post.

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