Monday, September 19, 2011

मौन समर्थन


मौन समर्थन

प्रेम सागर सिंह

जब भी नैराश्य की कालिमा में खोने लगता हूँ

जब लगने लगता है- निरूद्देश्य भटकता हूँ,

जब मन भर आता है,

पलकें लुढकना चाहती हैं,

हृदय के सूनेपन को वेदनाएँ भरना चाहती हैं

जब मन का सूरज अस्त होने लगता है,

थके हृदय का पसीना आँखों में चमकता है।

जब बोझिल थका सिर

किसी प्रेमी कंधे पर टिकना चाहता है-

उत्साह बुझ-बुझ सा जाता है,

उमंग सूख-सूख सा जाता है,

तुम्हारे हृदय का मौन समर्थन,

तुम्हारी वाणी का अनिर्णीत उल्लास,

आँखों से बरस-बरस पड़ता प्रेमाग्रह,

तुम्हारे पोर-पोर में रचा-बसा प्रेम,

तुम्हारे हृदय का निर्मल उच्छवास,

भर देता है मेरे रोम-रोम में प्रेम.

तुमने मुझमें कुछ देखा है या नही

यह तो तुम्हारा मन ही जानता है।

पर मैंने तुममे जो कुछ भी देखा है

उसे मेरा दिल ही जानता है

मैं तुम बिन कितना विकल रहता हूँ,

यह तो रब ही जानता है ।

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69 comments:

  1. जब बोझिल थका सिर

    किसी प्रेमी कंधे पर टिकना चाहता है-
    जीवन की सच्चाई को उजागर करती गहन अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

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  2. सुखमय होता साथ किसी का।

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  3. @ बोझिल थका सिर किसी प्रेमी कंधे पर टिकना चाहता है-

    मन को सुकून देते इस पल की कोई कीमत नहीं। मन को स्पर्श करती यह रचना बहुत ही भावपूरित है।

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  4. प्रेम का एक ये भी अन्दाज़ होता है……………बहुत सुन्दर

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  5. जब बोझिल थका सिर

    किसी प्रेमी कंधे पर टिकना चाहता है-
    जो भी है बस यही एक पल है..सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  6. तुमने मुझमें कुछ देखा है या नही
    यह तो तुम्हारा मन ही जानता है।
    अक्सर कविता का जन्म नैराश्य की ओर
    जाते हुए,उल्लास की ओर आते हुए, उलझ्न मे समाधान है।
    आशावादी भावाभिव्यक्ति ।

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  7. पर मैंने तुममे जो कुछ भी देखा है

    उसे मेरा दिल ही जानता है

    मैं तुम बिन कितना विकल रहता हूँ,

    यह तो रब ही जानता है ।

    बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति है ...सुन्दर रचना पढवाने के लिए आभार

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  8. प्रेम की गहरी अनुभूति लिए ... खूबसूरत रचना ...

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  9. ek nayno ka prem hi to hai, ek sparsh ka prem hi to hai chaahe vo ek preyasi ka ho, maa ka ho ya ek maasoom bacche ka ho yahi anubhooti pradan karta hai.

    sach ko samitTi nirmal rachna.

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  10. अनामिका जी आपका आभार । आपकी टिप्पणी से मेरा मनोबल बढा। है । धन्यवाद ।

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  11. sunder prem abhivyakti sahi hai jeevan hamesha ek dusre ke nahi chal sakta bahut sunder likha hai
    badhai
    rachana

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  12. रचना जी आपका आभार ।

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  13. जीवन की सच्चाई को उजागर करती गहन अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

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  14. बहुत सुन्दर एवं सार्थक शब्दों के साथ
    आप भी जरुर आयें यहाँ और मेरी मित्रता सदस्य बन कर स्वीकार करें तीनों का
    MADHUR VAANI
    BINDAAS_BAATEN
    MITRA-MADHUR

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  15. प्रियवर प्रेम सागर सिंह जी
    प्रेम सहित नमस्कार !

    तुम्हारे हृदय का मौन समर्थन
    तुम्हारी वाणी का अनिर्णीत उल्लास

    आंखों से बरस-बरस पड़ता प्रेमाग्रह
    तुम्हारे पोर-पोर में रचा-बसा प्रेम
    तुम्हारे हृदय का निर्मल उच्छवास

    भर देता है मेरे रोम-रोम में प्रेम


    … अच्छा जी ! तो प्रेम के प्रेम बनने और बने रहने का राज़ यह है :)


    मैं तुम बिन कितना विकल रहता हूं
    यह तो रब ही जानता है


    …बहुत सुंदर रचना है
    ♥हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !♥

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  16. राजेंद्र जी एवं चेद्रभूषण जी आप दोनों का आभार । धन्यवाद ।.

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  17. गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  18. atyant hi bhawuk......bahut achchi lagi.

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  19. This comment has been removed by the author.

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  20. तुमने मुझमें कुछ देखा है या नही
    यह तो तुम्हारा मन ही जानता है।
    पर मैंने तुममे जो कुछ भी देखा है
    उसे मेरा दिल ही जानता है
    मैं तुम बिन कितना विकल रहता हूँ,
    यह तो रब ही जानता है...
    waah... kitna khoobsoorat hai ye saath, ye prem...
    lajawaab...

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  21. प्रेम-सरोवर से छलकता हुआ प्रेम .. आह्लादित हुई.आभार.

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  22. बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  23. जीवन की सच्चाई को उजागर करती गहन अभिव्यक्ति .......

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  24. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 26-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  25. प्रेम के रस से सरावोर सुंदर भावाभिव्यक्ति. बधाई सुंदर प्रस्तुति के लिये.

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  26. आपकी इस प्रस्तुति पर
    बहुत-बहुत बधाई ||

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  27. बहुत सुन्दर और बहुत कुछ कहती रचना
    My Blogs:
    Life is just a Life
    My Clicks...
    .

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  28. aadarniy sir
    ek bekal man ki vyatha ko aapne bakhuubi vyakt kiya hai.
    prem -ras se sarobaar aapki rachna man ko aahladit
    kar gai.bahut hi bhav-purn prstuti.
    bahut bahut badhai
    sadar naman
    poonam

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  29. वाह! बड़ी सुनदर प्रेमासिक्त रचना....
    सादर...

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  30. यह तो रब ही जानता है ।- बहुत ही गहरी उक्ति ! सबका मालिक एक है !

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  31. बहुत ही सुन्दर भाव भर दिए हैं पोस्ट में........शानदार| नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं.

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  32. तुम्हारे पोर-पोर में रचा-बसा प्रेम,
    तुम्हारे हृदय का निर्मल उच्छवास,
    भर देता है मेरे रोम-रोम में प्रेम।

    प्रेम की सुकोमल अभिव्यक्ति।

    मेरी भूल की ओर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद, प्रेम सागर जी।

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  33. महेंद्र वर्मा जी आपका आभार । धन्यवाद ।

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  34. तुमने मुझमें कुछ देखा है या नही
    यह तो तुम्हारा मन ही जानता है।
    पर मैंने तुममे जो कुछ भी देखा है
    उसे मेरा दिल ही जानता है

    प्रेम की गहराई और मन में चलने वाली उठापठक को आपने सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है ....यहाँ प्रेम जीवन दर्शन बन पड़ा है और प्रेमी आदर्श .....आपका आभार

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  35. आहा... निर्मल प्रेम और समर्पण की कैसी सरल सुन्दर अभिव्यक्ति है...
    मन को सींच जाती है...
    बहुत ही सुन्दर रचना...वाह..

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  36. Nice post.

    गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरी भारी है
    ऐ ग़ाफ़िल तुझसे भी चढ़ता इक और बड़ा ब्योपारी है
    क्या शक्कर मिसरी क़ंद गरी, क्या सांभर मीठा-खारी है
    क्या दाख मुनक़्क़ा सोंठ मिरच, क्या केसर लौंग सुपारी है
    सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा।
    http://hbfint.blogspot.com/2011/09/blog-post_8879.html

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  37. रंजना एवं डॉ. अनवर जमाल जी आप सबका आभार ।

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  38. तुम्हारे हृदय का मौन समर्थन,

    तुम्हारी वाणी का अनिर्णीत उल्लास,

    आँखों से बरस-बरस पड़ता प्रेमाग्रह,

    तुम्हारे पोर-पोर में रचा-बसा प्रेम,

    तुम्हारे हृदय का निर्मल उच्छवास,

    भर देता है मेरे रोम-रोम में प्रेम.

    - एक वीर-हृदय के सहज प्रेमोद्गार प्रभावित करने में समर्थ हैं .
    अपने देश के रक्षक, सैनिक को मेरा नमन !

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  39. प्रतिभा सक्सेना जी पहली बार किसी ने मेरे सैनिक सत्ता को स्वीकार किया है । आपके जजबे को भी सलाम करता हूँ । धन्यवाद ।

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  40. बहुत सुंदर. हालांकि कविता के बारे में मेरी जानकारी कम है, लेकिन आपकी रचना दिल को छूने वाली है. ब्लोग पेर आना अच्छा लगा.

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  41. पर मैंने तुममे जो कुछ भी देखा है

    उसे मेरा दिल ही जानता है

    मैं तुम बिन कितना विकल रहता हूँ,

    यह तो रब ही जानता है ।

    लाजवाब पंक्तियाँ.

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  42. मैं जानू या रब जाने
    और न जाने कोय।

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  43. सुनीता जी, अभिषेक मिश्र एवं देवेंद्र पाण्डेय जी आप सबका आभार।

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  44. maun prem yun hin jivan mein aanad bhar deta hai...bahut sundar rachna, badhai.

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  45. दिल से निकली हुई नज़्म दिल को छू गयी.

    आपकी कलम को सलाम.

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  46. शबनम जी आपका मेरे पोस्ट पर आना बहुत ही अच्छा लगा एवं मन को एक सुखद अहसास की अनुभूति से पुलकित कर गया ।
    धन्यवाद ।

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  47. विशाल जी आपका भी आभार ।
    धन्यवाद ।

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  48. सबसे पहले हमारे ब्लॉग 'खलील जिब्रान' पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.........आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे|

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को भी)

    http://jazbaattheemotions.blogspot.com/
    http://mirzagalibatribute.blogspot.com/
    http://khaleelzibran.blogspot.com/
    http://qalamkasipahi.blogspot.com/

    एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

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  49. इमरान अंसारी जी आपका आभार । मैं वादा करता हूँ कि भविष्य में जो भी व्लॉग पसंद आएगा तो उसका अनुसरण करूँगा । धन्यवाद ।

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  50. प्रेम में सहजता से उठती हुई तरंगे व सरलता एवं लौलित्य से बहती हुई उत्तम रचना के लिए आपको बधाई.

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  51. तुम्हारे हृदय का मौन समर्थन,

    तुम्हारी वाणी का अनिर्णीत उल्लास,

    आँखों से बरस-बरस पड़ता प्रेमाग्रह,

    तुम्हारे पोर-पोर में रचा-बसा प्रेम,

    तुम्हारे हृदय का निर्मल उच्छवास,

    भर देता है मेरे रोम-रोम में प्रेम.bhut hi achi panktiyan.

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  52. Beautiful...Heart and love depicted so nicely in the poem...

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  53. सबसे पहले आपको तथा आपके परिवार को मेरी तरफ से विजय दशमी के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामना / रही आपकी कविता की बात तो, मैं यही कहना चाहूँगी कि आप बड़े संवेदनशील हैं और इसका परिचय आपकी कविताओं से मिल जाता है /

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  54. संध्या जी आपकी प्रतिक्रिया से मेरा मनोबल बढ़ा है।.
    धन्यवाद ।

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  55. विजया दशमी पर्व आप सब को मंगलमय एवं शुभ हो

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  56. तत्सुखें सुखिनः की स्थिति शायद यही है, प्रेम का चरमोत्कर्ष भी यही है. साधुवाद इस एह्साब और अनुभव के लिए. आपने इतना पाया बहुत पाया. बधाई .

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  57. बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति....आपका ब्लॉग पढ़ कर बहुत अच्छा लगा..बधाई!

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  58. तुम्हारे हृदय का मौन समर्थन...!

    बहुत ही सुन्दर!!

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  59. bahut hi achi kavita.....bdhai swikaar karen...

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  60. कृप्या अपने में ब्लॉग में शेयर बटन को चालू करें ताकि मैं आपकी रचनाओ को हिन्दी ब्लॉग परिवार से लिंक दे सकूँ http://dir.kirtigautam.in

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