Monday, January 10, 2011

आओ शुरूआत करें

एक बार एक नवजवान ऑफिसर ऑफिस से बहुत सारा काम लेकर घर आया। उसका पाँच साल का बेटा घर पर इंतजार कर रहा था ताकि वह अपने पिता के साथ खेल सके।लेकिन पिता ने अपने बेटे से कहा-”मुझे ऑफिस का बहुत सारा काम करना है क्योंकि अभी बहुत सारा काम पीछे रह गया है।“बेटे ने पिता की बात सुनकर कहा,”पिता जी जब मैं अपनी कक्षा में पीछे रह जाता हूं तो अध्यापक सुझे आहिस्ता चलने वाले बच्चों की कक्षा में बिठा देते हैं।,आपके ऑफिस वाले आपको ऐसे ही आहिस्ता-वर्ग में क्यों नही डाल देते!”पिता ने इस बात का जबाब देते हुए कहा-“रक्षा मंत्रालय की दुनिया में ऐसा दस्तूर नही है।“लेकिन बच्चे को पिता की बात समझ में नही आई।वह तो बस उनके साथ खेलने का जिद कर रहा था। आखिरकार पिता ने बच्चे को काम में उलझाए रखने का रास्ता ढूंढ़ निकाला ताकि पिता अपने ऑफिस का काम बिना किसी रूकावट के पूरा कर सकें। उसके पास एक पत्रिका थी जिसके मुख्य पृष्ठ पर विश्व की तस्बीर बनी हुई थी। उसने उस पन्ने को फाड़ा और उसके कई छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए।तब उसने अपने बेटे से कहा,-बेटा, तुम विश्व की इस फटी सी तस्बीर को जोड़ो तभी मैं तुन्हारो साथ खेलूंगा।:पिता जानता था कि इस तस्बीर को जोड़ने में बच्चे को काफी समय लगेगा। लेकिन पांच मिनट बाद ही बच्चा पिता जी से कहने लगा की उसने तस्बीर जोड़ ली है।पिता को बच्चे की बात पर विश्वास नही आया लेकिन जब उसने तस्बीर को जुड़ा हुआ देखा तो हैरानी से बच्चे से पूछा – “तुमने इतनी जल्दी इसे कैसे किया। “तुमसे तो मुझे सीखने की जरूरत है।“बेटे ने सहज भाव से जबाब दिया,”पिता जी यह काम तो बड़ा आसान था।जिस पन्ने पर विश्व की तस्बीर बनी थी उसके दूसरी तरफ एक मनुष्य की तस्बीर बनी हुई थी। मैने तो उस आदमी की तस्बीर को जोड़ा और पलट कर देखा तो दुनिया जुड़ी हुई मिली।“

12 comments:

  1. आँखे खोलने वाली लघु कथा

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  2. सारगर्भित शिक्षा, दूसरा पक्ष देखने का।

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  3. बच्चे ने खेल-खेल में अपने पिता को एक बहुत बड़ी सीख दे दी । नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  4. बच्चों की बात में परमात्मा बस्ता है ...

    आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ...

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  5. गहरी शिक्षा!! मानव जोड़ो दुनिया जोड़ो!!
    तस्वीर का दूसरा पहलू कई बार बहुत पते
    की बात कह जाता है.

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  6. कथा का सार ही तो है
    मानव से ही संसार है .......

    अच्छी प्रस्तुति .

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  7. अच्छी लघुकथा है.
    plz.visit:http://kunwarkusumesh.blogspot.com

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  8. aadarniy sir
    bahut hi gahari baat aapne kahai di is aalekh ke jariye.bilkul sach bachche ke shabd the jo usne anjaane hi kahe par vastav me insaan ekjut ho jaaye to pura vishv ek hi najar aayega.
    bahut hi prerak avam prabhavpurn prastuti.
    hardik abhinandan---------
    poonam

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  9. पूनम जी मेरा आशीर्वाद ग्रहण करें। बहुत अच्छा कहा है-आपने।नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  10. आदरणीय प्रेम सरोवर जी
    आपकी यह शिक्षाप्रद कथा ..बहुत असर कर गयी दिल और दिमाग पर ..आपका लेखन अनवरत रूप से जारी रहे यही कामना है ..शुक्रिया

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