Sunday, September 21, 2014

एहसास की चुभन

एहसास की चुभन
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तुम्हारा  साथ भी 
गुलाबों की तरह 
किताबों में दबाया 
जा सकता तो कितना 
अच्छा होता ......
हल्का-हल्का 
महकता 
कभी कभी कुछ कहता 
थोडा थोडा सा चुभता
तुम बंध जाती इन 
किताबों की सलवटों में 
और मैं तुम्हें 
हाथों से महसूस करता 
छूता.....चूमता और 
सीने लगा कर सो जाता
बहुत सुकूं भरी रातें होती 
वो सच .....
मोहब्बत 
पढ़ती और 
मोहब्बत कहते हुए 
किताब के उस मोड़ संग 
अपना जीवन गुजार देता
कितना 
प्रेम होता हमारे 
जहां में 
न तुम्हें मुझसे 
दूर जाने का डर होता 
न मुझे तुम्हारी 
जुदाई का गम

तुम और मैं 
गुलाब से रहते 
सदा जवां-जवां 
अपने प्यार की यादों में ........

12 comments:

  1. मीठे एहसास भरी रचना ...

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  2. Prem bhai dil jeet liya aapki rachna ne....

    meri nayi post ko aapke aashirvaad ka intezaar hai....

    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2014/09/blog-post.html

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  3. सुंदर रचना , सर धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 23 . 9 . 2014 दिन मंगलवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  4. Bhaawpurn dil ko chu gayi aapki rachna,,, umdaa

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  5. आपकी रचना बहुत ही खुबसुरत हैँ।
    माँ सरस्वती की कृपा से आपकी अगली रचना इससे भी अच्छी हो । कभी वक्त मिले तो इधर भी आ जाना आपका हमेँ इंतजार रहेगा

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  6. आपका ब्लॉग RSD Style Studio पर प्रकाशित किया गया है आके अवलोकन करे या फिर
    http://rsdiwraya.blogspot.in/

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  7. सुंदर, प्रेमपूर्ण रचना !

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  8. sundar prastuti ..mere blog par aane ke liye aapka bahut bahut dhanywaad..new post ..aur tum bhi ho...पढ़िए मेरी नयी ग़ज़ल.

    आज कयामत की रात है, और तुम भी हो.
    आज बग़ावत वाली बात है, और तुम भी हो.

    आज उलझे हुए ज़ज्बात हैं, और तुम भी हो.
    आज बिखरे से हालात हैं, और तुम भी हो.

    आज मौसम में बहार है, और तुम भी हो.
    आज साँसों में खुमार है, और तुम भी हो.

    पूरी ग़ज़ल पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक कीजिए.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/2014/10/blog-post_26.html

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