Friday, April 8, 2011

जिंदगी

काफिला मिल गया था मुझे-

कुछ अक्लमंदों का

और तब से साल रहा है मुझे

यह गम

कि जिंदगी बड़ी बेहिसाबी से मैंने

खर्च कर डाली है

पर जाने कौन आकर

हवा के पंखों पर

चिड़ियों की चहचहाहट में

मुझे कह जाता है-

जिंदगी का हिसाब तुम भी अगर करने लगे

तो जिंदगी किस को बिठाकर अपने पास

बड़े प्यार से

महुआई जाम पिलाएगी !

किसके साथ रचाएगी वह होली

सतरंगी गुलाल की !

किसके पास बेचारी तब

दुख-दर्द अपना लेकर जाएगी !

कह जाता है मुझे कोई रोज

चुपके-चुपके, सुबह-सुबह।

****************

18 comments:

  1. बहुत भावपूर्ण

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  2. बेहद उम्दा

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  3. sundar rachna
    bahut bahut shubhkaamna

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  4. आप सब को धन्यवाद।

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  5. भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

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  6. बेहद उम्दा अभिव्यक्ति।

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  7. श्रीवास्तव जी बहुत- बहुत धन्यवाद।

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  8. भावपूर्ण रचना....अच्छा जीवन दर्शन

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  9. आदरणीय प्रेम सागर सिंह जी
    सादर अभिवादन !

    आपके यहां नियमित नहीं पहुंच पाने का अफ़सोस है …
    श्रेष्ठ सुंदर रचनाओं से वंचित रह जाता हूं …
    …जाने कौन आकर
    हवा के पंखों पर
    चिड़ियों की चहचहाहट में
    मुझे कह जाता है-

    जिंदगी का हिसाब तुम भी अगर करने लगे
    तो जिंदगी किस को बिठाकर अपने पास
    बड़े प्यार से
    महुआई जाम पिलाएगी !

    बहुत सुंदर कविता है ! बधाई !

    आपकी कुछ पुरानी प्रविष्टियां भी अभी पढ़ने के लिए खोली हैं …

    * शुभकामनाएं ! *
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  10. स्वर्णकार जी,
    एक लंबे अंतराल के बाद मेरे पोस्ट पर आपका आगमन मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है।आपको भी शुभकामनाएं।

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  11. बहुत सुन्दर भाव कई बार हम अपनी प्राथमिकताओं से कुछ जीवन के सहज सुन्दर पल निकाल देते हैं , जीवन की भाग दौद मे कहाँ किसी सहज सुख का भी आनन्द ले प्क़ाते हैं आपने मेरे दिल की बात लिखी है बहुत दिन से घर मे व्यस्त रहते हुये नेट से कुछ दूर रही और तब जाना उन सुखद क्षणों को बच्चों की किलकारिओं को उनके साथ जीवन के सहज पलों को इसी लिये सब के ब्लाग पर रोज़ नही आ पा रही हूँ बस 2-3 दिन की बात है। फिर वही सफर शुरू कर दूँगी लेकिन इन क्षणो ने कुछ रहत तो दी है। धन्यवाद सुन्दर रचना के लिये।

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  12. मनोभावों को बेहद खूबसूरती से पिरोया है आपने.....बधाई।

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  13. निर्मला कपिला जी एवं डा वर्षा सिंह जी,
    आप सब के दो शव्द ही सही मुझे अच्छे लगते हैं।आप सब ने मेरी भावनाओं को समझा और सराहा-मेरे लिए यही काफी है।धन्यवाद।

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  14. आप तो बहुत शानदार लिखते हैं... प्रेम सरोवर का पानी तो बहुत सुकून देने वाला है...
    मेरी तरफ से बधाई सवीकार करें

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